Chaupai 38


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥

शब्दार्थ – बंदि – लौकिक तथा पारलौकिक बंधन।

अर्थ – यदि कोई इसका १०० बार पाठ श्रद्धा एवं भक्ति से करेगा उसके लौकिक एवं पारलौकिक बंधन छूट जायेंगे एवं उसे महासुख की प्राप्ति होगी।

व्याख्या – यहाँ सत शब्द १०८ का बोधक है तथा बार शब्द दिन एवं संख्या वाचक है। कोई शब्द सर्वसाधारण के लिए अधिकार समर्पक हैं अर्थात् कोई भी मनुष्य (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री, इतर धर्मी कोई भी) यदि हनुमान चालीसा को १०८ बार प्रतिदिन के क्रम से १०८ दिन तक पाठ करें तो निश्चित उसका अनिष्ट बन्धन छूट जायेगा। यह हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने समस्त प्राणिमात्र को तुलसीदल प्रसाद रूप में वितरित किया है यह फलश्रुति है।