Chaupai 36


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥

शब्दार्थ – बलवीरा – बल से युक्त वीर।

अर्थ – जो अतुलनीय बलयुक्त वीर श्रीहनुमान जी महाराज का स्मरण करता है उसके समस्त संकट कट जाते हैं तथा सभी पीड़ायें मिट जाती हैं।

व्याख्या – हनुमान जी के स्मरण से श्रीशिव- पार्वती एवं श्रीसीता-राम-लक्ष्मण प्रसन्न होकर साधक के पंचक्लेश को हर लेते हैं। यथा –

सानुग सगौरि सानुकूल सूलपानि ताहि लोकपाल सकल लखन राम जानकी।
लोक परलोक को बिसोक सो तिलोक ताहि तुलसी तमाहि ताहि काहू बीर आन की।
केशरी किशोर बंदीछोर के नेवाजे सब कीरति बिमल कपि करुनानिधान की।
बालक ज्यों पालिहैं कृपालु मुनि सिद्ध ताको जाके हिये हुलसति हाँक हनुमान की॥

– ह.बा. १३