Chaupai 28


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

और मनोरथ जो कोई लावै। तासु अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥

शब्दार्थ – मनोरथ – अभिलाषा। अमित – असीम।

अर्थ – हे प्रभो। और जो आपके समक्ष कोई भी मनोरथ लेकर आता है, उस मनोरथ का अपने इसी जीवन में असीम फल पाता है।

व्याख्यासोइ अमित जीवन फल पावै यह पाठ मानने पर “वह व्यक्ति इसी जीवन में उस इच्छा का असीम फल पा लेता है” अर्थ होगा। भाव यह है कि मानव की इच्छायें प्रायः पूर्ण नहीं होतीं, यदि होती भी हैं तो शरीरान्त के पश्चात्। परन्तु हनुमान जी के समक्ष इसी जीवन में समस्त इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। यथा नाम कलि काम तरु केशरी कुमार को (ह.बा. ९)।

[१] गुरुदेव द्वारा सम्पादित श्रीहनुमानचालीसा के प्रामाणिक संस्करण में तासु अमित जीवन फल पावै पाठ है – जालस्थल सम्पादक।