Chaupai 27


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

सब पर राम राय सिरताजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥

शब्दार्थ – सब पर – सर्वोपरि। सब पर शब्द सर्वपर का तद्भव है यहाँ सर्वत्र लवराम् – इस प्राकृत सूत्र से र का लोप हुआ।

अर्थ – अर्थात् श्रीराम परब्रह्म और राजाओं के मुकुटमणि हैं। उनके भी सम्पूर्ण कार्यों को आपने ही सम्पन्न किया।

व्याख्या – श्रीराम जी सर्वोपरि हैं। यथा –

शंभु बिरंचि बिष्णु भगवाना। उपजहिं जासु अंश ते नाना॥

– रा.च.मा. १-१४४-६

अर्थात् श्रीराम राजाधिराज हैं फिर भी उनके सम्पूर्ण कार्यों को आपने ही सम्पन्न किया। भाव यह है कि सर्वोपरि परब्रह्म राजाधिराज भगवान् श्रीराम को भी जिनकी निरन्तर अपेक्षा रहती है, तो हम जैसे जीवों की उनके बिना कैसी स्थिति होगी। यथा – संकट समाज असमंजस भो रामराज काज जुग पुगनि को करतल पल भो (ह.बा. ६)।

प्रचलित प्रति में सब पर राम तपस्वी राजा पाठ है। इसका “श्रीराम परब्रह्म एवं तपस्वी राजा हैं” ऐसा अर्थ होगा।

[१] गुरुदेव द्वारा सम्पादित श्रीहनुमानचालीसा के प्रामाणिक संस्करण में सब पर राम राय सिरताजा पाठ है – जालस्थल सम्पादक।