Chaupai 25


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥

शब्दार्थ – निरन्तर – हमेशा, सदा।

अर्थ – सदैव भक्तों के द्वारा जप के विषय-भूत होने पर वीर हनुमान जी रोगों को नष्ट कर देते हैं एवं समस्त पीड़ाओं को हर लेते हैं।

व्याख्या – रोग यहां शारीरिक रोगों का वाचक है। पीड़ा शब्द का कामादि आध्यात्मिक पीड़ाओं से तात्पर्य है। भाव यह है कि गुरुदीक्षालब्ध श्रीहनुमन्मन्त्र का जप करने से साधक के शरीर के रोग तथा आध्यात्मिक ताप नष्ट हो जाते हैं।