Chaupai 24


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥

शब्दार्थ – भूत पिशाच – अकाल मृत्यु को प्राप्त उग्र आत्मा अथवा निम्न देवयोनि।

अर्थ – जब भावुक भक्त महावीर नाम सुना-सुना कर कीर्तन करते हैं उस समय भूत पिशाच उनके नजदीक नहीं आते।

व्याख्या – अब महावीर नाम विशेष की महत्ता कहते हैं। यह भूत पिशाचों का त्रासक है। यथा पूतना पिशाची जातुधानी जातुधान वाम रामदूत की रजाइ माथे मान लेत हैं (ह.बा. ३२)।