Chaupai 22


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

सब सुख लहहिं तुम्हारी शरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ २२ ॥

शब्दार्थ – सरना – शरण में। लहहिं – प्राप्त करते हैं।

अर्थ – हे हनुमान जी महाराज। आपकी शरण में जाकर साधक जन समस्त सुख प्राप्त कर लेते हैं। आप रक्षक हैं, अतः अब किसी का डर नहीं है।

व्याख्या – जय-विजय की भाँति आप किसी आगन्तुक को भगवान् के दर्शन से वंचित नहीं करते, अपितु उनसे पूछे बिना भी अपनी कृपालुता से आप श्रीराघव का दर्शन करा देते हैं। अब हम निर्भीक हो गये हैं। यथा साहसी समर्थ तुलसी को नाथ जाकी बाँह लोकपाल पालिबे फिर थिर थल भो (ह.बा. ६)।