Chaupai 11


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

लाय सँजीवनि लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥ ११ ॥

शब्दार्थ – सँजीवनि – द्रोणाचल से लाई हुई मृतसञ्जीवनी।

अर्थ – हे पवननन्दन। आपने द्रोणाचल से मृतसञ्जीवनी ले आकर श्रीलक्ष्मण को जिलाया तथा रघुबीर रामभद्रजूने प्रसन्नता से आपको अपने हृदय से लगा लिया।

व्याख्या – काल के विजेता मेघनाद ने कालस्वरूप श्रीलक्ष्मण को वीरघातिनी शक्ति से मूर्च्छित किया। अनन्तर करालं महाकाल कालं कृपालं (रा.च.मा. ७-१०८-२) श्रीहनुमान जी मूर्च्छित काल को कालातीत श्रीराघव पास ले आये तथा सुषेण के निर्देशानुसार सञ्जीवनी ले आकर श्रीलक्ष्मण को प्राणदान दिया एवं श्रीराघव के मङ्गलमय परिष्वङ्ग का अनुभव किया। यथा –

हरषि राम भेटेउ हनुमाना। अति कृतज्ञ प्रभु परम सुजाना॥

– रा.च.मा. ६-६२-१