Chaupai 02


॥ श्रीराम ॥

मूल (चौपाई) –

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनिपुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥

शब्दार्थ – अतुलित बल धामा – अतुलनीय बल के आश्रय।

अर्थ – आप श्रीराम जी के विश्वस्त दूत तथा अतुलनीय बल के आश्रय हैं तथा आप अञ्जनीपुत्र एवं पवनपुत्र नाम से प्रसिद्ध हैं।

व्याख्या – श्रीहनुमान जी श्रीराघव के अन्तरङ्गतम दूत हैं। अतः श्रीसीताजी के प्रति गोपनीय संदेशवाहक का कार्य इन्हीं को सौंपा गया। यथा –

बहु प्रकार सीतहिं समुझाएहु। कहि बल बीर बेगि तुम आएहु॥

– रा.च.मा. ४-२३-११

सुन्दरकाण्ड में श्रीसीताजी के समक्ष स्वयं कहते हैं रामदूत मैं मातु जानकी (रा.च.मा. ५-१३-९) और प्रामाणिकता के लिए करुणानिधान की शपथ करते हैं सत्य शपथ करुणानिधान की (रा.च.मा. ५-१३-९)। भाव यह है कि मुझमें दूत बननेकी कोई पात्रता न होने पर भी करुणानिधान की करुणा ने यह महत्त्वपूर्ण पद दे दिया।

हनुमान जी अतुलनीय बल के आश्रय हैं ही। यथा तेरे बल बानर जिताये रन रावन सों (ह.बा. ३३)। अथवा अतुलित बलशाली भगवान् श्रीराम हैं, यथा अतुलित बल अतुलित प्रभुताई (रा.च.मा. ३-२-१२)। उनके भी आश्रय हैं श्रीहनुमान। यथा चलेउ हरषि हिय धरि रघुनाथा (रा.च.मा. ५-१-४)।

अंजनि पुत्र पवन सुत नामा ये दोनों सम्बोधन हनुमान जी की मातृमत्ता एवं पितृमत्ता को सूचित करते हैं। अञ्जना जो पहले पुञ्जिकस्थला नाम की अप्सरा थीं इन्हें अगस्त्यजी के शाप से वानर शरीर प्राप्त हुआ। कामरूप धारण का सामर्थ्य होने से कदाचित् अञ्जना को दिव्य रूप सम्पन्न देखकर वायुदेव ने उनका मानसिक स्पर्श कर हनुमान जी जैसे महापराक्रमी महापुरुष को उनके गर्भमन्दिर में प्रतिष्ठित किया। रूपरहित होने से केशरी पत्नी का न तो सतीत्व भङ्ग हुआ और न ही साङ्कर्य दोष आया। क्योंकि वायु सम्पूर्ण प्राणियों के अन्तःस्थ हैं तथा प्रत्येक वस्तु के त्याग एवं स्वीकार में वही कारण हैं। वायु के बिना कभी भी न तो गर्भाधान सम्भव है और न तो बालक का जन्म – प्रसव पवन प्रेरेउ अपराधी (वि.प. १३६)। यहाँ यह भी ध्यान रहे कि रूपवान् का स्पर्श ही पदार्थ में विकृति लाता है किन्तु वायु रूपरहित स्पर्श वाला है यथा रूपरहितस्पर्शवान् वायुः (त.सं. १३)। वायु सामान्यतः प्रत्येक प्राणी के प्रत्येक अङ्ग का स्पर्श करता है, अतः वायवीय स्पर्श में दोष नहीं। वायु सबसे पवित्र है यथा पवनः पवतामस्मि (भ.गी. १०-३१) अतः परम पवित्र पिता से जन्म होने के कारण हनुमान जी परम पवित्रतम व्यक्तित्व सम्पन्न हुए।